बजट 2022: ऑनलाइन गेमिंग डेवलपर्स के लिए फंड स्थापित करने का प्रस्ताव - MPL के साई श्रीनिवास किरन
नियमों की अस्पष्टता के बावजूद, भारत के ऑनलाइन गेमिंग इकोसिस्टम ने महामारी के बाद से निवेशों में वृद्धि देखी है, और लाखों नए गेमर्स ने इस क्षेत्र में कदम रखा है। वैश्विक ऑनलाइन गेमिंग बाजार 2024 तक $218.7 बिलियन तक पहुँचने का अनुमान है, जो 2023 में $200 बिलियन के आंकड़े को पार कर जाएगा, जैसा कि गूगल ने बताया है।
इस विकास को देखते हुए, मोबाइल प्रीमियर लीग (MPL) के सीईओ और सह-संस्थापक साई श्रीनिवास किरन ने सरकार से आगामी बजट में गेम डेवलपमेंट समुदाय के समर्थन के लिए एक समर्पित फंड स्थापित करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि इस फंड से भारतीय डेवलपर्स और डिजाइनर्स को पूंजी मिल सकेगी, जिससे भारत को वैश्विक गेम डेवलपमेंट केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सके।
साईं श्रीनिवास ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि देश में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और संसाधनों की कमी के बावजूद कई सक्षम डिज़ाइनर और डेवलपर्स हैं, जो उच्च गुणवत्ता वाले गेम बनाने की क्षमता रखते हैं। उनके लिए ऐसे केंद्रों और विश्वविद्यालयों की आवश्यकता है जो इस समुदाय को सशक्त बना सकें। इस कदम से भारत को गेम डेवलपमेंट के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण स्थान मिलने की संभावना है।
उन्होंने कहा, "इसका एक तरीका यह हो सकता है कि विशेषीकृत केंद्रों और विश्वविद्यालयों की स्थापना की जाए, जो सक्षम डिजाइनरों, दृश्य कलाकारों और डेवलपर्स को समर्थन प्रदान करें, जिनके पास वैश्विक स्तर के गेम बनाने की क्षमता है, लेकिन आवश्यक संसाधन नहीं हैं। हम उम्मीद करते हैं कि इस वर्ष सरकार से अधिक स्पष्टता प्राप्त होगी। ऑनलाइन स्किल गेमिंग को अक्सर प्रतिबंधित श्रेणियों और दांव लगाने वाले खेलों के साथ भ्रमित किया जाता है। यदि एक समान नीति बनाई जाती है, तो यह इस क्षेत्र को स्थिरता प्रदान करेगी।"
साई श्रीनिवास ने यह भी उल्लेख किया कि MPL 2023 के मध्य तक अपनी कर्मचारी संख्या को 1000 से बढ़ाकर 2500 करने की योजना बना रहा है, जिससे गेम डेवलपर्स को नए अवसर मिल सकेंगे और भारतीय गेमिंग क्षेत्र में रोजगार में वृद्धि होगी।
इसके अतिरिक्त, ऑनलाइन गेमिंग उद्योग, खासकर रियल-मनी गेम्स को हाल के वर्षों में राज्य सरकारों द्वारा अधिक कड़ी निगरानी का सामना करना पड़ा है, और कई राज्यों में ऑनलाइन गेमिंग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। MPL उन कंपनियों में से एक है जो कर्नाटका ऑनलाइन गेमिंग प्रतिबंध कानून के खिलाफ अदालत में चुनौती दे रही है।
उद्योग में स्पष्टता की कमी के कारण, इस क्षेत्र ने प्लेटफार्मों के लिए एक कोड ऑफ कंडक्ट की मांग की है, जिससे वे बढ़ सकें। ऑल इंडिया गेमिंग फेडरेशन (AIGF) और इसके स्किल गेम्स कम्प्लायंस पार्टनर आर्थर डी. लिटिल (ADL) ने एक स्वतंत्र अनुपालन ऑडिट लॉन्च किया है, और MPL को इस ऑडिट द्वारा AIGF चार्टर के अनुरूप प्रमाणित होने वाली पहली कंपनी के रूप में नामित किया गया है।
इसके अलावा, उच्च कर दरें भी इस क्षेत्र के लिए चिंता का विषय रही हैं। पिछले वर्ष GST काउंसिल ने इस उद्योग में कर मुद्दों पर विचार करने के लिए मंत्रियों का एक समूह गठित किया था, और इस वर्ष इस पर अधिक स्पष्टता की उम्मीद है।
साईं श्रीनिवास का मानना है कि इस क्षेत्र को नीति और कर के दृष्टिकोण से स्थिरता की आवश्यकता है, ताकि गेम डेवलपर्स और प्लेटफॉर्म्स को एक स्पष्ट दिशा मिल सके, और वे अपनी पूरी क्षमता से काम कर सकें। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को ऐसे फंड की स्थापना करनी चाहिए जो डेवलपर्स को पूंजी प्रदान कर सके और उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले गेम विकसित करने के लिए प्रोत्साहित कर सके। इससे न केवल गेम डेवलपर्स को फायदा होगा, बल्कि भारतीय गेमिंग उद्योग को भी वैश्विक मंच पर पहचान मिलेगी।
निष्कर्ष
भारत में ऑनलाइन गेमिंग उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है, लेकिन इसके विकास में कई चुनौतियां भी हैं। सरकार से मिले समर्थन के साथ और उद्योग में अधिक स्पष्टता के साथ, भारत को गेमिंग क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया जा सकता है। साई श्रीनिवास किरन का यह प्रस्ताव एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, जो भारतीय गेमिंग डेवलपर्स को वैश्विक मंच पर सफलता हासिल करने का मौका देगा। इस प्रक्रिया में सरकार को नीति निर्माण में तेजी लानी होगी और गेमिंग समुदाय के लिए एक स्थिर और समर्थनकारी वातावरण तैयार करना होगा। —आज ही रजिस्टर करें